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झारखंड में JPSC भर्ती रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, नवनियुक्त अधिकारियों को राहत

रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक लगाई है। इससे उन नवनियुक्त अधिकारियों को राहत मिली है, जिन्होंने इस फैसले के खिलाफ अदालत का रुख किया था।

मामले की सुनवाई नवनियुक्त अधिकारियों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर हुई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि सरकार ने परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। उनका कहना था कि किसी परीक्षा में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक ही आधार पर दोषी मानना उचित नहीं है।

यह पूरा विवाद झारखंड में विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के बाद शुरू हुआ। सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था।

सरकार ने JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं की एक सूची भी जारी की थी। इस फैसले के खिलाफ छात्रों ने करीब 25 दिनों तक आंदोलन किया था। इसके बाद सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के लिए एक समिति बनाने की घोषणा की।

रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे पदों की परीक्षाएं शामिल थीं। इसके अलावा सरकारी पॉलिटेक्निक के लेक्चरर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट और कई प्रशासनिक एवं तकनीकी पद भी इस सूची में शामिल थे।

नौकरी पर मंडराया था संकट

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि चयन के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सरकारी विभागों में कार्यभार संभाल चुके हैं। ऐसे में नियुक्तियां रद्द होने से उनकी नौकरी पर सीधा असर पड़ता।

उनका तर्क था कि यदि जांच में किसी विशेष उम्मीदवार के खिलाफ गड़बड़ी के ठोस सबूत मिलते हैं तो उसके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन बिना व्यक्तिगत जांच और सुनवाई के सभी सफल उम्मीदवारों की नियुक्तियां रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर फिलहाल नवनियुक्त अधिकारियों को राहत मिली है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत सरकार के फैसले और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार करेगी।

 

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